पाँखुरी

Thursday, May 12, 2016

{ ३२९ } मेरी अम्मा..... प्यारी अम्मा....

›
जीवन को नाम देती, होठों को मुस्कान देती, स्वप्नों को परवान देती, हौसलों को उड़ान देती, मेरे दर्द में जो कराह देती, मेरे म...
Friday, May 6, 2016

{ ३२८ } मत बोलो ऊँचे बोल

›
बिक जाओगे यूँ ही माटी के मोल मत बोलो मुख से इतने ऊँचे बोल। बातें ही उठवाती हमसे तीर कमान बदल के रख देती ये सारा भूगोल। ...
Sunday, April 24, 2016

{ ३२७ } मर्जी उसकी

›
ईश्वर की मर्जी के बिन एक पत्ता भी न हिलता है जिसके भाग्य में जो होता उसको वो सब कुछ मिलता है......| ईश्वर ही जाने किसको क्या दे...
Monday, March 21, 2016

{ ३२६ } मन

›
मन की सुनना, मन की करना, मन की सुनते जाना है। मन ही काशी, मन ही काबा, मन ही बेद-पुराणा है। मन अच्छा तो जग अच्छा ...
Thursday, March 3, 2016

{ ३२५ } ख्वाहिश

›
अपने सुनहरे ख्वाबों की परतों में हमने बहुत ही करीने से सजा कर अपने कुछ टूटे अरमानों के दर्मियाँ अपनी एक छोटी सी ख्वाहिश रख द...
Thursday, February 25, 2016

{ ३२४ } मोहब्बत

›
याद है मुझे अपने इश्क की वो कहानी ख्वाबों में आती हैं वो बाते सुहानी.......। न जाने क्यों मुझसे रूठी रहती हैं......... हमा...
Friday, February 19, 2016

{ ३२३ } स्त्री हो या पुरुष

›
एक इन्सान सबमें होता है स्त्री हो या पुरुष---------- एक शैतान सबमें होता है स्त्री हो या पुरुष---------- जो निज में ...
Monday, February 15, 2016

{ ३२२ } आज नहीं तो कल हो शायद

›
सुन्दर लहजा, मीठे बोल, अनोखी बातें आज नहीं तो कल हों शायद। हर सिम्त उसकी ही जलवासाजी आज नहीं तो कल हो शायद। हर महफ़िल में...
1 comment:
Thursday, January 7, 2016

{ ३२१ } लदा काँधों पे अपना सलीब

›
लगने लगे हैं वो चेहरे कितने अजीब भूलूँ कैसे उन्हे जो थे दिल के करीब। फ़िसल गया पहलू से वो हसीं लम्हा जुड़ा था तार जिससे जो...
Wednesday, December 30, 2015

{ ३२० } रे ! मूढ़ मानव

›
रे ! मूढ़ मानव क्यूँ ढूँढ़ रहा इन छली मानवों के बनावटी मुखौटों के बीच धुँधले हो चुके आईने में अपना चेहरा......... जब...
1 comment:
‹
›
Home
View web version

About Me

My photo
गोपाल कृष्ण शुक्ल
खुश रहो !!! मस्त रहो !!!
View my complete profile
Powered by Blogger.