पाँखुरी

Monday, March 21, 2016

{ ३२६ } मन

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मन की सुनना, मन की करना, मन की सुनते जाना है। मन ही काशी, मन ही काबा, मन ही बेद-पुराणा है। मन अच्छा तो जग अच्छा ...
Thursday, March 3, 2016

{ ३२५ } ख्वाहिश

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अपने सुनहरे ख्वाबों की परतों में हमने बहुत ही करीने से सजा कर अपने कुछ टूटे अरमानों के दर्मियाँ अपनी एक छोटी सी ख्वाहिश रख द...
Thursday, February 25, 2016

{ ३२४ } मोहब्बत

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याद है मुझे अपने इश्क की वो कहानी ख्वाबों में आती हैं वो बाते सुहानी.......। न जाने क्यों मुझसे रूठी रहती हैं......... हमा...
Friday, February 19, 2016

{ ३२३ } स्त्री हो या पुरुष

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एक इन्सान सबमें होता है स्त्री हो या पुरुष---------- एक शैतान सबमें होता है स्त्री हो या पुरुष---------- जो निज में ...
Monday, February 15, 2016

{ ३२२ } आज नहीं तो कल हो शायद

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सुन्दर लहजा, मीठे बोल, अनोखी बातें आज नहीं तो कल हों शायद। हर सिम्त उसकी ही जलवासाजी आज नहीं तो कल हो शायद। हर महफ़िल में...
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Thursday, January 7, 2016

{ ३२१ } लदा काँधों पे अपना सलीब

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लगने लगे हैं वो चेहरे कितने अजीब भूलूँ कैसे उन्हे जो थे दिल के करीब। फ़िसल गया पहलू से वो हसीं लम्हा जुड़ा था तार जिससे जो...
Wednesday, December 30, 2015

{ ३२० } रे ! मूढ़ मानव

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रे ! मूढ़ मानव क्यूँ ढूँढ़ रहा इन छली मानवों के बनावटी मुखौटों के बीच धुँधले हो चुके आईने में अपना चेहरा......... जब...
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Wednesday, December 16, 2015

{ ३१९ } ज़िन्दगी को तरसते रहे

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ज़िन्दगी भर हम ज़िन्दगी को तरसते रहे मिला न कहीं सुख-चैन शोले बरसते रहे। हम ज़िन्दगी की यादों से बाहर न आ सके तनहाइयों में शबो-रोज़ य...
Monday, December 7, 2015

{ ३१८ } मेरी ये ज़िन्दगी

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ज़िन्दगी भर ज़िन्दगी से ही जँग जारी है अश्कों के सैलाब में तैरती कश्ती हमारी है। वक्त बन न सका दोस्त कभी भी हमारा वक्त के हर लम्हे ...
Sunday, December 6, 2015

{ ३१७ } मेरे हमदम

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कैसे भुला सकेंगें गुजरा है जो वक्त संग अपने......... तब खुली आँखों से देखे थे हमने तुमने जो अनगिनत सपने................ कोई फ़...
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गोपाल कृष्ण शुक्ल
खुश रहो !!! मस्त रहो !!!
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