पाँखुरी

Wednesday, June 22, 2016

{ ३३२ } तेरा अक्स हमें खूब रुलाता है

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जेहन में यादों का काफ़िला आता-जाता है तनहाइयों में भी दिल कुछ गुनगुनाता है। कोई दस्तक सी सुनाई दी बंद किवाड़ों पर शायद कोई...
Sunday, June 19, 2016

{ ३३१ } गोरिया करत अपन सिंगार

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गोरिया करत अपन सिंगार। बारन मां मोतिया चमकाये रोम-रोम महकाए भरै माँग सेंदुर से जब दम-दम मुखड़ा दमकाए जूड़े मां जूही कै माल...
Saturday, June 18, 2016

{ ३३० } शायद तब तक उपलब्ध गंगाजल नहीं

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कहीं शान्ति का स्थल नहीं मन विचलित, शान्त-शीतल नहीं आँखें सन्नाटॊं सी ठहर गईं हैं विचारों में भी बची हलचल नहीं निस्तब्...
Thursday, May 12, 2016

{ ३२९ } मेरी अम्मा..... प्यारी अम्मा....

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जीवन को नाम देती, होठों को मुस्कान देती, स्वप्नों को परवान देती, हौसलों को उड़ान देती, मेरे दर्द में जो कराह देती, मेरे म...
Friday, May 6, 2016

{ ३२८ } मत बोलो ऊँचे बोल

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बिक जाओगे यूँ ही माटी के मोल मत बोलो मुख से इतने ऊँचे बोल। बातें ही उठवाती हमसे तीर कमान बदल के रख देती ये सारा भूगोल। ...
Sunday, April 24, 2016

{ ३२७ } मर्जी उसकी

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ईश्वर की मर्जी के बिन एक पत्ता भी न हिलता है जिसके भाग्य में जो होता उसको वो सब कुछ मिलता है......| ईश्वर ही जाने किसको क्या दे...
Monday, March 21, 2016

{ ३२६ } मन

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मन की सुनना, मन की करना, मन की सुनते जाना है। मन ही काशी, मन ही काबा, मन ही बेद-पुराणा है। मन अच्छा तो जग अच्छा ...
Thursday, March 3, 2016

{ ३२५ } ख्वाहिश

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अपने सुनहरे ख्वाबों की परतों में हमने बहुत ही करीने से सजा कर अपने कुछ टूटे अरमानों के दर्मियाँ अपनी एक छोटी सी ख्वाहिश रख द...
Thursday, February 25, 2016

{ ३२४ } मोहब्बत

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याद है मुझे अपने इश्क की वो कहानी ख्वाबों में आती हैं वो बाते सुहानी.......। न जाने क्यों मुझसे रूठी रहती हैं......... हमा...
Friday, February 19, 2016

{ ३२३ } स्त्री हो या पुरुष

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एक इन्सान सबमें होता है स्त्री हो या पुरुष---------- एक शैतान सबमें होता है स्त्री हो या पुरुष---------- जो निज में ...
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गोपाल कृष्ण शुक्ल
खुश रहो !!! मस्त रहो !!!
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