पाँखुरी

Wednesday, May 28, 2014

{ २९२ } अब नहीं सही जाती

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बन्द कमरे में अकेले बीतती यह रातें अब नहीं सही जाती। शर्म के नाखूनों से खुरची हुई दीवारें कभी हम जीते कभी तुम हारे, कभी तुम ...
Tuesday, May 20, 2014

{ २९१ } सुख का सागर है अन्तर में

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क्या रक्खा इस काया नश्वर में सुख का सागर है अन्तर में।। बाहर जग की उष्मा, मरुथल का कोलाहल बाहर पनपते हैं दँभ-द्वेष औ...
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Monday, May 12, 2014

{ २९० } तुमसे ही हुआ जीस्त में उजियारा

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दिल में नक्श तुम्हारा ही उतारा है इश्क मे हमने तुमको ही पुकारा है। तड़पा तेरे बिन दिल भी रोया किया देखा है आँसुओं ने ये भी नजारा...
Wednesday, April 16, 2014

{ २८९ } मन मेरा उदास है

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मन मेरा जाने क्यों आज कुछ-कुछ उदास है।। बीती सुधियों से बोझिल आँखों में जब-तब आँसू भर आते हैं पलकों को करके बन्द हम यूँ ह...
Tuesday, March 11, 2014

{ २८८ } याद तुम्हारी

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अन्तर्मन के दर्पण में कौंध-कौंध जाती है याद तुम्हारी। बिरहन कोयल की कूक सी दर्द का तराना गाती है याद तुम्हारी। कोम...
Sunday, March 2, 2014

{ २८७ } आओ धनुर्धर आओ !

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आओ धनुर्धर आओ ! करोड़ो-जन यहाँ गिन रहे हैं समस्याओं के बियावान के पेड़-पौधे-पत्ते। करोड़ो-जन यहाँ प्रतीक्षा कर रहे हैं उस ध...
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Sunday, February 2, 2014

{ २८६ } शब्द

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शब्द, परमात्मा की श्रेष्ठ कृति है। शब्द, परमात्मा की अनुकृति है। शब्द, लिपि के वस्त्र पहन कागज पर उभर जाते हैं। शब्द, नाद ...
Saturday, February 1, 2014

{ २८५ } रहनुमा की तलाश

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देश के हालात पर नहीं किसी की नजर है बुलन्द मुल्क का महल हो रहा खन्डहर है। बौरा गये हैं बागबान अपने इस चमन के गुल को बिसरा रहे और ...
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Wednesday, January 15, 2014

{ २८४ } दो आँसू

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हर प्रातः संतान का स्वप्न उदर में सँजोये मेरी बाँझ आँखे गर्भवती होती है, पर, बाहर गूँजती हुई लज्जित करने वाली दानवी आवाजों से...

{ २८३ } आज का राम राज्य

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आओ ! राजघाट के कब्रिस्तान से उठकर आओ _____ और देखो इन खण्डहरों में तमाम दुश्वारियों की भट्ठी में भुनकर चिथड़ों मे ...
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गोपाल कृष्ण शुक्ल
खुश रहो !!! मस्त रहो !!!
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