पाँखुरी
Saturday, September 29, 2012
{ २०५ } एक हसीन ख्वाब
›
रंगीन रातों में एक हसीन ख्वाब।। जैसे हो प्रणय गीत भीनी सी मुस्कुराहट जैसे जलती मशाल निगारीं है रिहाइश, हुस्न है निसाब, ऐसा ह...
Friday, September 28, 2012
{ २०४ } रहते हैं दिल में याद आने के लिये
›
ऐसे बस जाते हैं दिल में याद आने के लिये नये-नये चेहरे, पुरानों को भुलाने के लिये। पर उसकी वो अदा यादों से जाती ही नही वो रूठ जात...
Tuesday, September 25, 2012
{ २०३ } ज़िन्दगी हुई बेवफ़ा
›
ज़िन्दगी हुई बेवफ़ा फ़िर भी मुझे प्यारी लगे खुशियाँ डूबी गम में फ़िर भी मुझे प्यारी लगे। ज़िन्दगी में हर चीज अनोखी सी ही लगती है ...
Sunday, September 23, 2012
{ २०२ } खोया बचपन
›
ढूँढ रहा हूँ मैं अपने बचपन को आशाओं के आवरण में, जाने कहाँ छुप गया है हमारा बचपन, जाने क्यों वो मेरे सँग आँख मिचौली खेल रहा है...
Saturday, September 22, 2012
{ २०१ } गमों को हँस-हँस कर भुलाओ
›
दुनिया में सभी को गले से तुम लगाओ किसी न किसी को हमदर्द तुम बनाओ। क्यों बैठ गये इन चरागों को बुझा कर अपनी आँखों से खुद को न तुम ...
Tuesday, September 18, 2012
{ २०० } इन्तिहा ये प्यार की
›
अच्छी नही लगती ये फ़िज़ा मुझे तेरे बगैर दिन-रात सताये ये ठँडी हवा मुझे तेरे बगैर। जल रहा सारा बदन इन्तिहा है ये प्यार की कौन बु...
{ १९९ } खुद को भूल जाऊँ मै
›
खुद तजुर्बा कर लूँ और दुनिया को बताऊँ मैं इश्क को याद रखूँ और खुद को भूल जाऊँ मैं। कोई तो खास बात है इस धोखेबाज इश्क में जानते-स...
Monday, September 17, 2012
{ १९८ } बिसात दरम्याने-ज़िन्दगी
›
वैसे हम पर तुम्हारे बहुत एहसान हैं फ़िर कैसे कहे हम बहुत परेशान हैं। आँख में सजा लिया ये सुनहरा मंजर आगे राह में सँगरेजे और बिया...
{ १९७ } नजर लड गयी है
›
नजर एक महजबीं से लड गय़ी है दिल में तीर बन कर गड गय़ी है। कैसे हटा लें उससे हम नजर को हाय जवानी जिद पर अड गयी है। नावाकिफ़ थे ...
Sunday, September 16, 2012
{ १९६ ) प्यासी ज़िन्दगी
›
ये ज़िन्दगी तो बस शराब का एक जाम है, जिसे पीकर होठ भीगें, पर प्यास फ़िर भी न बुझ पाये, और प्यासी ज़िन्दगी बढती जाये। बढत...
‹
›
Home
View web version