पाँखुरी

Sunday, April 21, 2013

{ २६१ } जी लें सुख के दो चार पल

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आओ सजनि, जी लें सुख के दो चार पल समय ने बढाईं जो दूरियाँ अब टल रहीं विषम-विवशतायें हाथ अपने मल रहीं सुधियों ने, सरोवर में ख...
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Saturday, April 6, 2013

{ २६० } उदास मन

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मन, बहुत उदास है आज, पर उसने अपने शरीर को उजले आवरण से ढँक रखा है, अपने चेहरे पर चिपका ली है एक बीमार सी मुस्कान और खोज रहा...
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Wednesday, April 3, 2013

{ २५९ } हसीन शाम

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कितनी हसी्न खिली है शाम आओ टकरायें जाम से जाम। लब भी गुनगुना उठे प्यार से बताओ ऐसा कोई प्यारा नाम। लौटॆं फ़िर से प्यार की खुश्...
Sunday, March 31, 2013

{ २५८ } आई है मिलन की रात

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देख मेरा प्रेम में महकना भूल गये तारे भी छिपना दिल भी भूल गया है घात आओ सजनि ! आई है मिलन की रात।।१।। आओ मिल कर गाये...
Friday, March 29, 2013

{ २५७ } आशाओं के दीप जलाओ

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आशाओं के दीप जलाओगे जब चहुँ ओर प्रकाश ही प्रकाश होगा। यदि टूट गये हों सपने तो क्या यदि छूट गये हों अपने तो क्या सबके सब च...
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Thursday, March 28, 2013

{ २५६ } बीती सुधियाँ

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तट पर नदी के बैठे हुए नदी को जी भर देखते रहना बीते दिनों की सुधियों को फ़िर नदी की धार से कहना।। याद है वो पीपल की छाँव जहाँ ...
Wednesday, March 27, 2013

{ २५५ } क्या थे इरादे और क्या कर चले

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जाने क्या-क्या थे इरादे और क्या कर चले जाने क्यों खुद को खुद से ही जुदा कर चले। गुलजार चमन को उजाडने वाले कह रहे है कहाँ अपने ही ...
Monday, March 18, 2013

{ २५४ } रूठ गईं चाँदनी रातें

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जाने क्यों रूठ गयीं हमसे वो चाँदनी रातें भूली-बिसरी यादें उनसे हुई वो मुलाकातें। तुम्हे भी याद होंगे बहारों के सुनहरे पल मुकद्दर...
Sunday, March 17, 2013

{ २५३ } मन करता है

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मन करता है मदमाते मौसम में फ़िर से रागमयी गीतों के मादक स्वर हो जायें।। वो ठहरी-ठहरी घडियाँ वो महकी-महकी रातें वो गहरी-गह...
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Friday, March 8, 2013

{ २५२ } मुस्कान वीरानी है

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मेरे हर ज़ख्म की खौफ़नाक कहानी है मायूस चेहरे पे छाई मुस्कान वीरानी है। गमों की चटक धूप झुलसा गयी है हमें भावनायें हो चुकी मौन क...
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गोपाल कृष्ण शुक्ल
खुश रहो !!! मस्त रहो !!!
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