पाँखुरी

Tuesday, March 11, 2014

{ २८८ } याद तुम्हारी

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अन्तर्मन के दर्पण में कौंध-कौंध जाती है याद तुम्हारी। बिरहन कोयल की कूक सी दर्द का तराना गाती है याद तुम्हारी। कोम...
Sunday, March 2, 2014

{ २८७ } आओ धनुर्धर आओ !

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आओ धनुर्धर आओ ! करोड़ो-जन यहाँ गिन रहे हैं समस्याओं के बियावान के पेड़-पौधे-पत्ते। करोड़ो-जन यहाँ प्रतीक्षा कर रहे हैं उस ध...
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Sunday, February 2, 2014

{ २८६ } शब्द

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शब्द, परमात्मा की श्रेष्ठ कृति है। शब्द, परमात्मा की अनुकृति है। शब्द, लिपि के वस्त्र पहन कागज पर उभर जाते हैं। शब्द, नाद ...
Saturday, February 1, 2014

{ २८५ } रहनुमा की तलाश

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देश के हालात पर नहीं किसी की नजर है बुलन्द मुल्क का महल हो रहा खन्डहर है। बौरा गये हैं बागबान अपने इस चमन के गुल को बिसरा रहे और ...
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Wednesday, January 15, 2014

{ २८४ } दो आँसू

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हर प्रातः संतान का स्वप्न उदर में सँजोये मेरी बाँझ आँखे गर्भवती होती है, पर, बाहर गूँजती हुई लज्जित करने वाली दानवी आवाजों से...

{ २८३ } आज का राम राज्य

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आओ ! राजघाट के कब्रिस्तान से उठकर आओ _____ और देखो इन खण्डहरों में तमाम दुश्वारियों की भट्ठी में भुनकर चिथड़ों मे ...
Wednesday, December 4, 2013

{ २८२ } पर अभी बाकी....

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करुणा की गाथायें जीवन भर ओढ़ चुका पर अभी बाकी अवसादों के ज्वार हैं।। ऊँची बातों वाली यह थोथी-थोथी खूब पढ़ी यह क्षण भँगुर जी...
Monday, December 2, 2013

{ २८१ } तू मुसाफ़िर.....

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तू मुसाफ़िर.................. किसकी याद सताये तुझे किसके बिना तेरा पल न बीते कौन सा दुख छुपाये तेरी आँखें छोड जमाने के इन मंजरो...
Sunday, October 27, 2013

{ २८० } आदमी कितना बेहाल हुआ

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दर्दे-जीस्त से दिल बहुत बेहाल हुआ पर अपने गुनाहों का न मलाल हुआ। यूँ हीं न हुई खारजारी जीस्ते-रहगुजर हैवान बना इंसान जी का जँजाल ...
Thursday, October 17, 2013

{ २७९ } उदासी

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इस मरुथली जीवन के कण-कण में बसी है एक हठीली उदासी। जाने कहाँ-कहाँ से बेहूदे खयाल जेहन में आते हैं और गौरय्या की चंचल फ़ुदक ब...
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गोपाल कृष्ण शुक्ल
खुश रहो !!! मस्त रहो !!!
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