Wednesday, September 14, 2022

{३४९ } अब न छूटेगा ये रास्ता मोहब्बत का




अंजाम हुआ क्या, बर्बाद मोहब्बत का 
क्यूँ कत्ल हुआ यारों, पाक मोहब्बत का। 

हम जाते हैं महफ़िल से टूटा दिल लेकर 
इंसाफ खुदा देगा, अब मेरी मोहब्बत का। 

वो नेह के बंधन थे, तुम तोड़ गए जिनको 
कमजोर बड़ा निकला, धागा मोहब्बत का। 

रोते हैं चमकते सितारे और रोती रातें भी 
देखो चाँद भी रोता है, अपनी मोहब्बत का। 

चाहे तुम मुझे यूँ ही बेअदब ही कहते रहो 
अब न छूटेगा मेरा ये रास्ता मोहब्बत का। 

............ गोपाल कृष्ण शुक्ल 

{३४८} तमाम उम्र का हिसाब निकाल के रख



तमाम उम्र का हिसाब निकाल के रख
बची जरा सी उम्र उसे सम्हाल के रख ।

हर कदम यहाँ फिसलन ही फिसलन है
बाकी सफर है कदम देख-भाल के रख। 

हसीन ख्वाब आते हैं पर सच नहीं होते 
इन्हे कुछ दिन के लिए तू टाल  के रख। 

हयात जैसी भी गुजरी है गुजरी बेहतर 
जो बाकी है उम्र बिना सवाल के रख। 

चिराग जैसे है वैसी ही है रौशनी उनकी 
चुनांचे जेहन में खयाल कमाल के रख। 

..  .. गोपाल कृष्ण शुक्ल 

{३४७ } खो गया हूँ शहर की रफ्तार में




मैं खो गया हूँ शहर की रफ्तार में 
दिल टहल रहा इश्क के गुलजार में|

अब तो नुक्कड़ भी नही पहचानता 
बैठा करता जहाँ मैं यूँ  ही बेकार मे |

उस गली मे फिर कहाँ जाना हुआ 
दिल जहाँ टूटा था पहले प्यार में|

मुस्कुराहट उलझनों मे बदल गई 
उलटफेर ये ज़िंदगी के गुलजार में |

लौट चलें फिर उस बचपन की ओर 
कुछ नहीं रखा जवानी के प्यार में|

.. .. गोपाल कृष्ण शुक्ल 

Sunday, February 25, 2018

{३४६} ज़िन्दगी किस्सा कहानी हो गई





प्यार की बातें  जहमत  और फ़ानी हों गईं
अब तो ये ज़िन्दगी किस्सा कहानी हो गई।

पुरानी हो गईं वो  इश्क-मोहब्बत की बातें
बिसरी यादों में  आँखें पानी-पानी हो गईं।

मोहब्बत में बहुत  सहा बेरुखी के दर्द को
दर्द मॆं ही बर्बाद हमारी ये जवानी हो गई।

अपनों का अपनों से भरोसा ही उठ गया
फ़रेब ज़िन्दगी की सच्ची कहानी हो गई।

आखिरी फ़रमान  रब  का  कब आ जाए
अब जहाँ की  बातें  आनी-जानी हो गईं।

.................................................... गोपाल कृष्ण शुक्ल "राही"

Sunday, October 1, 2017

{३४५} शहीद हूँ मैं




शहीद हूँ मै............ !!!

मेरे देश वासियों,
मेरे लिये सिर्फ़ इतना कर देना
कि,
जब कभी आप खुलकर हँसें,
जब आप शाम को अपने घर लौटॆं
और अपनों से मिलें,
जब आप अपने बच्चों के सँग खेलें,
जब आप सुकून से सोयें,
मुझे भी कभी याद कर लेना........
मेरे देश वासियों,
मेरे लिये सिर्फ़ इतना कर देना......।।

आप और आपका परिवार
आज जिन्दा है,
क्योंकि,
नहीं हूँ.... आज मैँ......!!!

अपनी भारत माँ के लिये,
आपकी शान्ति और सुख के लिये,
भारत की अखन्डता के लिये,
भारत की सीमाओं पर
अपने प्राण निछावर कर दिये हैं मैंने...........

शहीद कहलाता हूँ मैं,
शहीद हूँ मैं।
शहीद हूँ मैं।।

.................. गोपाल कृष्ण शुक्ल "राही"

{३४४} हम तुम




हम तुम
हाँ तुम,

अब तुम
तब तुम,

मैं कब
जब तुम,

मैं क्या
सब तुम,

पाया क्या
तुम ही तुम,

ख्वाहिश क्या
केवल तुम,

सोंचूँ क्या
सिर्फ़ तुम,

क्या मेरे
रब तुम,

हाँ मेरे
रब तुम।।

...... गोपाल कृष्ण शुक्ल "राही"

Tuesday, May 2, 2017

{३४३} बिगड़ी नियति की चाल





बदनियती  की  है  चाल
फ़ैलाया  कहाँ तक जाल।

सूखते  ही  जा रहे हैं क्यों
सब झील नदी और ताल।

परिन्दे  को  पता  ही नहीं
बिगड़ी  नियति की चाल।

कु्छ चँद निवालों के लिये
उसकी  ही  खिंचेगी खाल।

फ़िर  उड़ेगा  या कि मरेगा
बड़ा  ही  कठिन है  सवाल।

पिंजरे में हुआ बन्द नसीब
जीस्त का नहीं पुरसाहाल।

वाह  रे  मालिक ! तेरी वाह
ज़िन्दगी दी है बड़ी कमाल।

................................. गोपाल कृष्ण शुक्ल


Sunday, April 30, 2017

{३४२} चढ़ गई मोहब्बत परवान





लो चढ़ गई मोहब्बत परवान है
कर दूँ ये जान  तक  कुर्बान है।

इश्क का सम्मान करेगा वो ही
जिंदा जिस शख्स में इंसान है।

इश्क का  तज़ुर्बा हुआ उसे भी
चाहत से वो  कब अनजान है।

हाय रे  कातिल अदा की नज़र
न कहो कि वो अभी नादान है।

यूँ तो न दूर जाइये ऐ नाज़्नीन
वस्ल का पल रहा अरमान है।

........................................... गोपाल कृष्ण शुक्ल

Tuesday, April 25, 2017

{३४१} मुरझा चली हैं तमन्नायें





खो गईं हैं सब कामनायें
सो गईं हैं  सम्भावनायें।

पास रह  गईं हैं उलझने
यातनायें  ही  यातनायें।

नाम की  बस  ज़िन्दगी
मर गई  सब  भावनायें।

रब भी  अब सुनता नहीं
लौट आईं सब प्रार्थनायें।

अब छोड़ ही दूँ ये दुनिया
मुरझा चली हैं तमन्नायें।

........................................ गोपाल कृष्ण शुक्ल

Thursday, April 20, 2017

{३४०} नज़रों से दरकिनार मत करना





या तो किसी से प्यार  मत करना
या इश्क का किरदार मत करना।

गिरा दो ये नफ़रतों के ऊँचे महल
नादान दिलों में दरार मत करना।

नादानियों  में  खो  न  जाऊँ कहीं
नज़रों  से  दरकिनार  मत करना।

मँज़िलें  ख्वाब बन कर न रह जाएँ
ऐसे वक्त का इन्तज़ार मत करना।

दिल  की  लगी  को  दिल  ही जाने
 दिल को कभी  बेकरार मत करना।

................................. गोपाल कृष्ण शुक्ल