पाँखुरी
Wednesday, January 15, 2014
{ २८४ } दो आँसू
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हर प्रातः संतान का स्वप्न उदर में सँजोये मेरी बाँझ आँखे गर्भवती होती है, पर, बाहर गूँजती हुई लज्जित करने वाली दानवी आवाजों से...
{ २८३ } आज का राम राज्य
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आओ ! राजघाट के कब्रिस्तान से उठकर आओ _____ और देखो इन खण्डहरों में तमाम दुश्वारियों की भट्ठी में भुनकर चिथड़ों मे ...
Wednesday, December 4, 2013
{ २८२ } पर अभी बाकी....
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करुणा की गाथायें जीवन भर ओढ़ चुका पर अभी बाकी अवसादों के ज्वार हैं।। ऊँची बातों वाली यह थोथी-थोथी खूब पढ़ी यह क्षण भँगुर जी...
Monday, December 2, 2013
{ २८१ } तू मुसाफ़िर.....
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तू मुसाफ़िर.................. किसकी याद सताये तुझे किसके बिना तेरा पल न बीते कौन सा दुख छुपाये तेरी आँखें छोड जमाने के इन मंजरो...
Sunday, October 27, 2013
{ २८० } आदमी कितना बेहाल हुआ
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दर्दे-जीस्त से दिल बहुत बेहाल हुआ पर अपने गुनाहों का न मलाल हुआ। यूँ हीं न हुई खारजारी जीस्ते-रहगुजर हैवान बना इंसान जी का जँजाल ...
Thursday, October 17, 2013
{ २७९ } उदासी
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इस मरुथली जीवन के कण-कण में बसी है एक हठीली उदासी। जाने कहाँ-कहाँ से बेहूदे खयाल जेहन में आते हैं और गौरय्या की चंचल फ़ुदक ब...
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Monday, October 14, 2013
{ २७८ } शाश्वत-जाल
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मैं वह मनुष्य हूँ जो कहलाता है विधाता का सर्वश्रेष्ठ निर्माण पर, संसार से हूँ अब तक अग्यात और कहलाता हूँ अल्पग्यता का स...
Saturday, October 12, 2013
{ २७७ } नया संसार बसाया जाये
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गमगीन दिलों के ज़ख्मों को सहलाया जाये आओ चमन से रूठी बहारों को मनाया जाये। टकरा के कहीं चूर-चूर न हो जायें ये आइने आओ कि इन पत्...
Sunday, September 22, 2013
{ २७६ } थोड़ा सुस्ता लो
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ज़िन्दगी की राह में चलते-चलते बहुत थक गयी लगती हो थोड़ा सुस्ता लो सपनों को फ़िर से सहेज लो बिखरे अरमानों को समेट लो बढ़ाओ फ़िर स...
Wednesday, August 14, 2013
{ २७५ } मोहब्बत का मुकद्दर
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दिल को बहलाने की अच्छी तदबीर है वो नहीं न सही, साथ उसकी तस्वीर है। उसके चेहरे की चमक रहती कुछ ऐसी जैसे चाँद की चाँदनी उसकी जागीर ...
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