पाँखुरी

Sunday, February 27, 2011

{ २५ } उलझन......

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नफ़रतों की आग में मेरी मोहब्बते रख दी गयीं, मेरे हिस्से में उदासियाँ ही उदासियाँ रख दी गयी। अब गुमसुम सा बैठा हूँ, आँसू पलकों पर ठहरे है, द...
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Saturday, February 26, 2011

{ २४ } चलो कहीं और चले...

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यहाँ की रौनकें अब अपने लिये तो रही नही, चलो कहीं और चलें, यहाँ फ़ागुनी बयार नहीं, पतझर का मौसम है, चलो कहीं और चलें। इस मतलबी जहाँ में तो स...

{ २३ } हुस्न.....

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कितना दिलकश है तेरा ये हुस्न-ए-शबाबी बडी मादक हैं तेरे ये चश्म-ए-आफ़्ताबी हसीन हैं तेरे ये होठ नीलोफ़रे-माहताबी नाजुक गुल से है तेरे ये दस्त...

{ २२ } यकीन..

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मोहब्बत के ज़ज़्बे को दिल में जगा के तो देखो ज़रा मुझको अपना चश्मे-शब बना के तो देखो। मत सोचो ये कि हम गुजरे हुए कल के...

{ २१ } इश्क.....

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घबराइये न हिज्र और में न ही आँसू बहाइये लिल्लाह अब तदबीर कर मेरे नजदीक आइये। बहुत दूर-दूर रह लिये अब तो रहा जाता नहीं हो दिल में...

{ २० } मोहब्बत

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तस्लीम कर रहा हूँ मोहब्बत मैं आपकी चाहता हूँ उम्र भर हिफ़ाजत मैं आपकी। होना नही है रूबरू दुनिया से अब मुझे रहूँगा बनके जानेजाँ उलफ़त मै आप...

{ १९ } दिल की पीर.......

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फ़िर आज मैने एक गज़ल गुनगुनाई है दिल में आज चोट बडी ही गहरी खाई है। पत्थर बने मोम आबाशर भी गए हैं थम मेरे दिल की पीर...

{ १८ } दिल की बात

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मुस्कुराये एक जमाना हो गया गुजरे लम्हों का फ़साना हो गया। याद कहती है वह वहीं पर हैं खडे क्या नया था क्या पुराना हो गया। बात जो ...
Friday, February 25, 2011

{ १७ } ...... मेरे साथ हैं

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मेरी बेचैनी, मेरी उलझन, मेरी उदासी सब मेरे साथ हैं बिछडे लम्हे, गुजरी यादों की धुँधली तस्वीरें मेरे साथ हैं। शहर-गलियाँ-राहे-चौराह...

{ १६ } रोया बहुत.......

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किस्मत आजमाई आशिकी में पाया तो कुछ नहीं, खोया बहुत गया जब भी नदी के किनारे लहरों ने भी ठुकराया, रोया बहुत।               ...
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गोपाल कृष्ण शुक्ल
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