पाँखुरी

Tuesday, October 4, 2022

{३६२ } जाने क्यों कँटीली हो गई डगर

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जब अँधेरों  को हो  गई ख़बर तब रोशनी भी हो गई बेअसर।  हम वजन रदीफ़ में उलझे रहे  रह गई काफिये में ही कसर।  हर सिम्त खुद को ही ढूँढ़ा किये  खो गए...
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Monday, October 3, 2022

{३६१} क्यूँ तू मुझसे नज़र मिलाता नहीं

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दूर रहना तुझे सुहाता नहीं  पर नजदीक तू आता नहीं।  हम इस कदर क्यूँ मजबूर हैं  क्यूँ हो मंजूर जो भाता नहीं।  तुझे शिकवा मेरे न आने का  मेरी मु...
Saturday, October 1, 2022

{३६०} मौन हूँ मैं

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मौन हूँ मैं, मौन रह कर ही  बता पाऊँगा दुनिया को  कि मेरे हृदय में भी  कुछ जज़्बात मचलते हैं, दिल बल्लियों उछलता है, चाहता मैं भी हूँ  कि प्या...
Friday, September 30, 2022

{३५९} मासूम अश्क

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तुम जब से रूठ कर  मुझसे दूर गए हो  एक मासूम अश्क  पलकों के कोनों मे  अटक सा गया है।  शायद इस मासूम अश्क को  आज भी तुम्हारा इंतजार है  ये मास...
Thursday, September 29, 2022

{३५८} तुम सम्हले नहीं

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तुम्हें याद है पिछली बार तुम कब ठिठके थे  अपने अंतःकरण के द्वार पर, कब खोली थी साँकल तुमने अपने अंतर्मन की, कब बजे थे  कुछ शब्द  तुम्हारे का...
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Tuesday, September 27, 2022

{३५७ } गति और नियति

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घर मे दीवारें हैं  दीवारों मे बन्द खिड़कियाँ हैं  बन्द खिड़कियों से  टकराकर अपना सर  लहूलुहान पड़ी है  मेरी संवेदना।  संवेदना ही आरोपित है  संव...
Sunday, September 25, 2022

{३५६ } लौट कर नहीं आते कभी ये

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ठहरता नहीं कोई पल  ठहरता नहीं कोई कल  ठहरता नहीं बहता हुआ जल  ठहरती नहीं हवा की हलचल  क्यों देख कर रहा है मचल क्यों हो रहा है यूँ बेकल   लौट...
Thursday, September 22, 2022

{३५५ } हम चमन-चमन इश्क बोते हैं

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हम चमन-चमन इश्क बोते हैं  फिर उन्हे आँसुओं से भिगोते है।  गगन को सजाता हूँ मोहब्बत से  फूल, सूरज, चाँद-चाँदनी होते हैं।  मौसमों के रुख बदलने...
Wednesday, September 21, 2022

{३५४ } हम उनसे मिलना चाहते हैं

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हम उनसे मिलना चाहते हैं  जो कम से कम  यह जानते हैं  कि वे कुछ नहीं जानते  हम उनसे कतई नहीं मिलना चाहते  जो अपनी जानकारी को ही  विज्ञान मानते...
Monday, September 19, 2022

{३५३ } जीवन का यही ताना-बाना

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फ़ूल खिलते हैं  सूख जाते हैं  झर जाते हैं, काँटे भी मिलते हैं  चुभते हैं  बिखर जाते हैं, सुख आता है  सुख जाता है  रुकता नहीं है, दुख भी आता ह...
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गोपाल कृष्ण शुक्ल
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