पाँखुरी
Tuesday, July 19, 2011
{ ४७ } बेचारों से हम
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कब तक चुप रहेंगे बेचारों से हम, त्रस्त कब तक रहेंगे अजारों से हम| आग जंगल की तरफ़ अब बढ रही, दूर कब तक रहेंगे अँगारों से हम। दर्द से बोझिल...
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Friday, July 15, 2011
{ ४६ } जरूरत है
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रक्त में जमी हुई बर्फ़ को पिघलाने की जरूरत है, चूर-चूर हुए हृदय को जरा सहलाने की जरूरत है। कश्ती बह रही है दरिया मे मेरी पर है लक्ष्य-हीन, ...
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Monday, July 11, 2011
{ ४५ } दुर्दशा
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गाँधी तुम तो कहते थे कि भारत में फ़िर से राम-राज्य स्थापित करेंगे..? क्या यही राम-राज्य है....? गाँधी कहाँ है तुम्हारी लाठी...? शायद, उसी...
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Friday, July 8, 2011
{ ४४ } जख्म
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जिन्दगी में जख्म ऐसे-ऐसे दिल में हुआ करते है, रिसते रहते है जख्म दिल फिर भी दुआ करते है | गमों में घुटती साँसे, हरतरफ अँधेरा हवा बेरहम, सब ...
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Thursday, June 30, 2011
{ ४३ } इश्क के बगैर
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ज़िन्दगी बेनूर हो चुकी है इश्क के बगैर, अब तो दिन गुजर रहे हैं, इश्क के बगैर। बहुतों ने दिया है हौसला अपने इश्क का, पर मायूस किया, जी रहा इ...
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Thursday, June 9, 2011
{ ४२ } फ़िजायें भारी
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क्यों हो गयी है आज देश की ये फ़िजायें भारी, अब घुट रहा दम, हो गयी इतनी फ़िजाये भारी। चैनो-आराम खोया, बहता लहू राहों-चौराहों पर, कराह हुई मु...
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Monday, June 6, 2011
{ ४१ } मजबूर ज़िंदगी
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हम को अब ये जुल्म सहने की आदत हो गयी है, चुपचाप दर्दो-गम सह लेने की आदत हो गयी है| अपनी ज़िंदगी एक लाश सी ढो रहे हैं इस दौर में, इन वहशी दर...
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{ ४० } सुर्ख गुलाब
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नैनो मे नीर है, अनकहे प्यार की पीर है, हर आईने मे छिपी प्यार की ही तस्वीर है। लौट आयी हर खुशी, मस्ती रंगीनी अपनी, प्यार ने ही बदल दी देखो म...
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