पाँखुरी

Sunday, March 27, 2011

{ २७ } प्रीत

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स्वप्न दर्शित आस को विश्वास देकर मनुज को एकत्व का वरदान दे दो ॥ प्यार से आबध्द कर उन्मन मनों को अहम की भ्रान्ति को सत्वर मिटा कर भाव मे सदभा...
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Thursday, March 17, 2011

{ २६ } बन्द ज़ुबाँ

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बन्द जुबाँ से क्या कुछ भी पता लगता है, जख्म दिल पर रोज एक नया लगता है। बिजलियाँ गिरी हैं मोतबरी की मीनारों पर, उदासियाँ साथी है, चमन पराया ...
Sunday, February 27, 2011

{ २५ } उलझन......

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नफ़रतों की आग में मेरी मोहब्बते रख दी गयीं, मेरे हिस्से में उदासियाँ ही उदासियाँ रख दी गयी। अब गुमसुम सा बैठा हूँ, आँसू पलकों पर ठहरे है, द...
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Saturday, February 26, 2011

{ २४ } चलो कहीं और चले...

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यहाँ की रौनकें अब अपने लिये तो रही नही, चलो कहीं और चलें, यहाँ फ़ागुनी बयार नहीं, पतझर का मौसम है, चलो कहीं और चलें। इस मतलबी जहाँ में तो स...

{ २३ } हुस्न.....

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कितना दिलकश है तेरा ये हुस्न-ए-शबाबी बडी मादक हैं तेरे ये चश्म-ए-आफ़्ताबी हसीन हैं तेरे ये होठ नीलोफ़रे-माहताबी नाजुक गुल से है तेरे ये दस्त...

{ २२ } यकीन..

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मोहब्बत के ज़ज़्बे को दिल में जगा के तो देखो ज़रा मुझको अपना चश्मे-शब बना के तो देखो। मत सोचो ये कि हम गुजरे हुए कल के...

{ २१ } इश्क.....

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घबराइये न हिज्र और में न ही आँसू बहाइये लिल्लाह अब तदबीर कर मेरे नजदीक आइये। बहुत दूर-दूर रह लिये अब तो रहा जाता नहीं हो दिल में...

{ २० } मोहब्बत

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तस्लीम कर रहा हूँ मोहब्बत मैं आपकी चाहता हूँ उम्र भर हिफ़ाजत मैं आपकी। होना नही है रूबरू दुनिया से अब मुझे रहूँगा बनके जानेजाँ उलफ़त मै आप...

{ १९ } दिल की पीर.......

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फ़िर आज मैने एक गज़ल गुनगुनाई है दिल में आज चोट बडी ही गहरी खाई है। पत्थर बने मोम आबाशर भी गए हैं थम मेरे दिल की पीर...

{ १८ } दिल की बात

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मुस्कुराये एक जमाना हो गया गुजरे लम्हों का फ़साना हो गया। याद कहती है वह वहीं पर हैं खडे क्या नया था क्या पुराना हो गया। बात जो ...
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गोपाल कृष्ण शुक्ल
खुश रहो !!! मस्त रहो !!!
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