पाँखुरी

Thursday, December 8, 2022

{४११ } आ लौट चलें फिर उन उजालों की ओर

›
आ लौट चलें फिर उन उजालों की ओर  उन जवाबों के लिए उन सवालों की ओर।  वो गली राह देखती होगी अभी भी हमारी  उस राह से दूर रह के बीते सालों की ओर।...
Saturday, December 3, 2022

{४१० } तुम्हारी आँखें

›
तुम्हारी आँखें, बड़ी ही खूबसूरत हैं।  बिजलियाँ गिराती हैं, बड़ा कहर ढ़ाती हैं, समन्दर सी गहरी हैं,  जादू है, सम्मोहन हैं, नदी की तरंग हैं,  उदा...
Sunday, November 27, 2022

{४०९} शब्दों का क्या?

›
शब्द, शब्दों का क्या? शब्द तो ढ़ेरों हैं  अर्थ भरे और निरर्थक भी, जिसकी जैसी ज़ुबान  उसके पास वैसे ही शब्द।  कुछ शब्दों पर भरोसा है  कुछ भरोसे...
4 comments:
Wednesday, November 23, 2022

{४०८} टूटते बिखरते सपने

›
जैसे-जैसे बढ़ता है सपनों का आकार  वैसे-वैसे ही बढ़ती जाती है  अपने हँसते हुए चेहरे को  सपने में देखने की अभिलाषा,  फिर, कहीं दूर  सपने में सुन...
Sunday, November 20, 2022

{४०७} बस मैं जिन्दा हूँ

›
बस मैं जिन्दा हूँ।  है मुझको आभास, बचा फकत अहसास, कीमत में दे दिया  उसूलों को अपने, ले ही लिया सन्यास, खामियों का पुलिंदा हूँ, बस मैं जिन्दा...
Thursday, November 17, 2022

{४०६ } नज़्म कहाँ रखी है मैंने

›
कब से ढूँढ़ रहा हूँ  रिसालों में, नई-पुरानी  किताबों के वर्क में, नज़्म कहाँ रखी है मैंने? नज़्म को ढूँढ़ते-ढूँढ़ते मिल जाते हैं  कलम, दवात, कोरे...
Saturday, November 12, 2022

{४०५ } मोहब्बत

›
मोहब्बत, जो न दिखाई देती है  और न ही सुनाई देती है, मोहब्बत तो बस  सच्चे दिलों को  महसूस होती है, मोहब्बत,  सुकून भी देती है  पर उससे कहीं ज...
Wednesday, November 9, 2022

{४०४ } क्या पढ़ें हम दर्द की व्याकरण

›
क्या पढ़ें हम दर्द की व्याकरण  ज़िन्दगी कट रही चरण चरण।  सच को भी वो सच कहते नहीं  आचरण पे पड़ा हुआ आवरण।  मोह किससे अब कहाँ तक रहे  बँध न पाते...
Monday, November 7, 2022

{४०३} तेरे ही इंतज़ार सी हुई ज़िन्दगी

›
रूठी रूठी बहार सी हुई ज़िन्दगी  टूटी टूटी पतवार सी हुई ज़िन्दगी।  न रोशनी है न जलता  हुआ चराग  उजड़ी टूटी मजार सी हुई ज़िंदगी।  न मँजिल, कारवाँ ...
Saturday, November 5, 2022

{४०२ } देने वाले ने क्या ज़िन्दगी दी है

›
देने वाले ने  क्या  ज़िन्दगी दी है  क्यों  मेरे साथ  दिल्लगी की है।  हम ने  बरसों  जिगर जलाया है  फिर कहीं दिल में रोशनी की है।  आप से दोस्ती...
‹
›
Home
View web version

About Me

My photo
गोपाल कृष्ण शुक्ल
खुश रहो !!! मस्त रहो !!!
View my complete profile
Powered by Blogger.