पाँखुरी

Sunday, October 1, 2017

{३४५} शहीद हूँ मैं

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शहीद हूँ मै............ !!! मेरे देश वासियों, मेरे लिये सिर्फ़ इतना कर देना कि, जब कभी आप खुलकर हँसें, जब आप शाम को अपने ...
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{३४४} हम तुम

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हम तुम हाँ तुम, अब तुम तब तुम, मैं कब जब तुम, मैं क्या सब तुम, पाया क्या तुम ही तुम, ख्वाहिश क्या के...
Tuesday, May 2, 2017

{३४३} बिगड़ी नियति की चाल

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बदनियती  की  है  चाल फ़ैलाया  कहाँ तक जाल। सूखते  ही  जा रहे हैं क्यों सब झील नदी और ताल। परिन्दे  को  पता  ही नहीं ब...
Sunday, April 30, 2017

{३४२} चढ़ गई मोहब्बत परवान

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लो चढ़ गई मोहब्बत परवान है कर दूँ ये जान  तक  कुर्बान है। इश्क का सम्मान करेगा वो ही जिंदा जिस शख्स में इंसान है। इश्क ...
Tuesday, April 25, 2017

{३४१} मुरझा चली हैं तमन्नायें

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खो गईं हैं सब कामनायें सो गईं हैं  सम्भावनायें। पास रह  गईं हैं उलझने यातनायें  ही  यातनायें। नाम की  बस  ज़िन्दगी मर...
Thursday, April 20, 2017

{३४०} नज़रों से दरकिनार मत करना

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या तो किसी से प्यार  मत करना या इश्क का किरदार मत करना। गिरा दो ये नफ़रतों के ऊँचे महल नादान दिलों में दरार मत करना। ना...
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{३३९} ज़ख्म की ज़ख्म ही दवा है

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यारों तुमने  सच ही कहा है ज़ख्म की  ज़ख्म ही दवा है। उसके  जाने  का  न  हो दर्द दिल  पे  पत्थर  ही  रखा  है। ज़ख्म दिखा क...
Friday, March 24, 2017

{३३८} डगर जीवन की

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कैसे छोड़ूँ जीवन की आपा-धापी, कैसे कुछ आराम करूँ झाँकूँ अतीत के झरोखों से, थकन मिटाऊँ विश्राम करूँ। खूब लड़ चुके हम झूठ-फ़रेब स...
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Saturday, March 18, 2017

{३३७} होली

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ऐसी होली मनाओ, मजा आ जाए दूरियाँ सब मिटाओ, मजा आ जाए। किसी को छोटा या बड़ा समझो नहीं खूब रँगो और रँगाओ, मजा आ जाए। रँग ...
Wednesday, March 15, 2017

{३३६} सत्य क्या है?

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सत्य क्या है? क्या दृश्य ही सत्य है, और अदृश्य असत्य? या फ़िर, दोनो ही सत्य हैं? बहुत उलझा हुआ है प्रश्न और शायद अनुत्तरित भी। ...
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गोपाल कृष्ण शुक्ल
खुश रहो !!! मस्त रहो !!!
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