पाँखुरी
Monday, October 31, 2022
{३९७} मेरा परिचय क्या
›
मैं क्या, मेरा परिचय क्या। प्रभु सत्ता से भिन्न मेरी अपनी सत्ता क्या। ये जीवन, जीव-मरण का अभिनय है, सुकर्म, मनुज-जीवन की यज्ञ-आहुति, पर...
Sunday, October 30, 2022
{३९६ } तुम्हारे इंतजार में
›
वापस जाते हुए चूमना था तुम्हें, अपनी आँखों से ओझल होने तक देखना था तुम्हें, होंठों की बुदबुदाहट बन्द होने के पहले कहने थे कुछ शब्द, गिन...
Saturday, October 29, 2022
{३९५ } ज़िन्दगी दर्द भी है खूबसूरत भी
›
अदावत भी है और मोहब्बत भी ज़िन्दगी दर्द भी है खूबसूरत भी। शबे-रोज पढ़ता हूँ तुम्हारी आँखें ये शरारत भी है और मोहब्बत भी। ज़िन्दगी में ...
6 comments:
Thursday, October 27, 2022
{३९४ } तुम पर है जाँ निसार
›
तुम पर है जाँ निसार कर लो अब एतबार। फिरता हूँ मैं भटकता कब से हूँ मैं बेकरार। तिशनगी रूह की मिटे आ बन कर वो फुहार। हो गई दर्द की इंतिह...
{३९३ } चाहत के हरफ़
›
कुछ और मेरे पास आ मेरे सँग तू भी मुस्कुरा। भरोसा न हो गर मुझपे तू रकीबों के पास जा। क्यों हो रही बावरी सी घड़ी दो घड़ी रुक जरा। इ...
Wednesday, October 26, 2022
{३९२} ज़िन्दगी का हिसाब
›
मेरी ज़िन्दगी की किताब काँटों सजा कोई गुलाब। वक्त की कश्मकश में ढ़ल गया उम्र का शबाब। कभी दिन सवाल से खड़े कभी रात उसका...
{३९१ } जहर के घूँट हँस-हँस के पिए हैं
›
जहर के घूँट हँस-हँस के पिए हैं हम बहरहाल सलीके से जिए है। एक दिन हमको भी याद करोगे चंद अफ़साने जमाने को दिए हैं। हमको दुनिया से दिली मोहब...
Sunday, October 23, 2022
{३९० } खुशियों को कैसे मैं गम कहूँ
›
मिली खुशियों को कैसे मैं गम कहूँ मुस्काती आँखों को कैसे नम कहूँ। तेरा ही तो मेरे दिल पर राज है सिर्फ तुमको ही तो मैं सनम कहूँ। देख क...
Friday, October 21, 2022
{३८९ } ये मेरी बज़्म नहीं
›
ये मेरी बज़्म नहीं मगर दिल मेरा यहाँ लगा है। जाने वालों को रोको मत रँगे-महफ़िल तो जमा है। एक मँजर सा मेरे दिल में आरजुओं का भी लग...
8 comments:
{३८८ } आँखों में बसा किसी का ख्वाब है
›
आँखों में बसा किसी का ख्वाब है हुजूर उसका नूर बहुत लाजवाब है। बैठे हैं कई रिन्द एक लम्बी कतार में उसकी आँखे जैसे महँगी शराब है। मेरी...
‹
›
Home
View web version